Karak In Hindi : कारक के भेद परिभाषा एवं उदाहरण

Karak in hindi : हिंदी व्याकरण की इस श्रृंखला में आप जानेंगे कारक के भेद एवं कारक की परिभाषा इसके अलावा इससे सम्बंधित उदाहरण भी देखेंगे ताकि इसके बारे में आपकी समझ और भी विकसित हो सके।

कारक किसे कहते हैं | What is karak in hindi

कारक = कार ( काम ) + क ( करना, कराना ) = काम करनेवाला।
कारक का अर्थ है काम करनेवाला यानी 'कर्ता'। कारक ( कर्ता ) का क्रिया से सम्बन्ध होता है।

आगे चलकर ' कारक ' शब्द का अर्थ - विकास हुआ। क्रिया के साथ सम्बन्ध को ' गुण ' मानकर ' कारक ' शब्द का अन्यत्र भी प्रयोग होने लगा।

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कारक की परिभाषा : जिसका भी क्रिया के साथ सम्बन्ध हो , वह ' कारक ' कहलाता है और  इन सम्बन्धों को सूचित करनेवाले शब्दांश को ' विभक्ति ' कहते हैं ।

(क) राम श्याम देखता है ।
राम श्याम अलग हो गया ।
राम श्याम पुस्तक दी ।

(ख) राम श्याम को देखता है ।  
राम को श्याम देखता है ।
राम श्याम से अलग हो गया ।    
राम से श्याम अलग हो गया ।
राम ने श्याम को पुस्तक दी ।    
राम को श्याम ने पुस्तक दी ।

( क ) के वाक्यों में कौन किसे देखता है ; कौन किससे अलग हो गया और किसने किसे पुस्तक दी , यह स्पष्ट नहीं है। बात स्पष्ट रूप से कह देना ही भाषा का काम है और इन वाक्यों में यही नहीं हो रहा है ।

पर ( ख ) के वाक्यों में बात स्पष्ट है - ' विभक्तियों के प्रयोग के कारण । संज्ञाओं को कर्ता - कर्म आदि कारकों में विभक्त करना विभक्तियों का काम है ।

- राम घर देखता है ।
- कन्या वर खोजती है ।

इन वाक्यों में विभक्ति की जरूरत नहीं है , क्योंकि विभक्ति के अभाव से बात स्पष्ट होने में कोई सन्देह नहीं है ।

प्रथम वाक्य में घर को आँखें नहीं है कि वह ' राम ' को देखे । देखनेवाला राम ही है ।
दूसरे वाक्य में ' को ' के अभाव में भी ' खोजती है ' क्रिया - रूप से यह दात स्पष्ट है कि ' कन्या ' ही ' कता है , वही खोजती है ।

क्रिया के साथ कारक का संबंध : Karak in hindi

क्रिया - मारा

1. क्रिया करनेवाला ? - राम ने मारा ।
2. क्रिया का फल ? - राम ने रावण को मारा ।
3. क्रिया का साधन ? - राम ने रावण को वाण से मारा।
4. किसके लिए ? - राम ने सीता के लिए रावण को मारा।
5. कहाँ से बिछुड़कर ? - रान ने पंचवटी से हरी गयी सीता के लिए रावण को मारा ।
6. किससे सम्बन्ध ? - राम ने लंका के राजा रावण को मारा ।
7. कहाँ ? - राम ने लंका के युद्ध में रावण को मारा ।
8. किसे सम्बोधित किया गया ? - हे तात ! राम ने रावण को मारा ।

कारक के भेद , विभक्तियाँ एवं सम्बन्ध इस प्रकार हैं - 

कारक विभक्ति सम्बन्ध
कर्ता ०,ने जो काम करता है
कर्म ०, को जिस पर काम का प्रभाव पड़े
करण से जिसके द्वारा काम हो
सम्प्रदान को,के लिए जिसके लिए काम हो
अपादान से जिससे कोई वस्तु अलग हो
सम्बन्ध का,के,की जिसका सम्बन्ध किसी दुसरे कारक से हो
अधिकरण में,पै,पर जो काम करने का आधार या स्थान हो
सम्बोधन हे,हो,अरे,अरी जिसे संबोधित कर कहा जाय


1. कर्ता कारक (विभक्ति -० , ने)

● रमेश रो रहा है । 

● संतजी आनेवाले हैं । 

● मुन्नी ने भात खाया । 

● गाय ने दूध देना बन्द कर दिया ।

ऊपर के वाक्यों में ' रमेश ' और ' संतजी ' के आगे कोई विभक्ति नहीं है , पर निश्चय ही वे काम करने वाले हैं । 

यहाँ शून्य ( ० ) विभक्ति है या यों कहें कि विभक्ति लुप्त है । तीसरे एवं चौथे वाक्यों में ' ने ' विभक्ति का प्रयोग हुआ है । 

अतः , जो क्रिया ( काम ) क - र - ता है उसे ' कर्ता ' कहते हैं । 

पहचान - क्रिया में ' कौन ' लगाकर प्रश्न करने पर जो उत्तर मिले , वही कर्ता है । 

टिप्पणी - कर्ता की ' ने ' विभक्ति के प्रयोग के लिए यह अध्याय ।


2. कर्म कारक (विभक्ति -० , को)

● मैं चित्र देखता हूँ। 

● चिट्ठी फाड़ डालो। 

● कृष्ण ने कंस को मारा।

पहले और दूसरे वाक्य में क्रमशः ' चित्र ' और ' चिट्ठी ' के आगे कोई विभक्ति नहीं है । पर इन्हें इस प्रकार से लिखा जा सकता है- 

- मैं चित्र को देखता हूँ | 

- चिट्ठी को फाड़ डालो । 

निस्सन्देह देखने का फल चित्र पर और फाड़ने का फल चिट्ठी पर पड़ता है । तीसरे वाक्य में मारने का फल कंस पर पड़ता है । 

अतः , जिस पर क्रिया का फल पड़े उसे ' कर्म ' कहते हैं । 

पहचान - क्रिया में ' क्या ' , ' किसको ' या ' किसे ' लगाकर प्रश्न करने पर जो उत्तर मिले , वही कर्म है ।


3. करण कारक ( विभक्ति - से )

● गीता पेसिल से लिखती है। 

● उमेश चोर को डंडे से पीटता है।


पहले वाक्य में गीता लिखने की क्रिया ' पेंसिल ' से करती है । दूसरे वाक्य में उमेश पीटने की क्रिया टुंडे ' से करता है। इस प्रकार , ' पेंसिल ' और ' डंडा ' क्रिया के साधन हैं , अतः ये करण कारक हैं।

अतः क्रिया के साधन को ' करण ' कहते हैं । 

पहचान - क्रिया में ' किससे ' लगाकर प्रश्न करने पर जो उत्तर मिले , वही करण है । 

टिप्पणी-  

( क ) कहीं - कहीं करण की विभक्ति ' से ' लुप्त रहती है । 

जैसे- न आँखों ( से ) देखा , न कानों ( से ) सुना । 

शत्रुओं को दाँतों ( से ) चने चबाने पड़े । 

वह पैरों ( से ) चलकर आया है |


( ख ) करण के ' से ' का बोध ' द्वारा ' या ' के द्वारा ' से भी होता है -

' पत्र से हाल पूछना । पत्र द्वारा हाल पूछना । 

टेलीफोन से खबर करो । टेलीफोन के द्वारा खबर करो । 

ज्ञान से सुख मिलता है । ज्ञान द्वारा सुख मिलता है ।


4. सम्प्रदान कारक (विभक्ति- के लिए , को)

( क ) बीमार के लिए दवा लाओ ।
उनके लिए विछावन ठीक करो ।
हमारे लिए पढ़ाई की व्यवस्था हो ।

( ख ) विद्यालय को भवन चाहिए ।
उसको कोटिशः धन्यवाद ।
बेरोजगार को नौकरी चाहिए ।

( क ) के वाक्यों में ' के लिए ' और ( ख ) के वाक्यों में ' को ' का प्रयोग हुआ है । यहाँ ' बीमार ' , ' विद्यालय ' आदि के लिए क्रियाएँ सम्पादित हुई हैं । ये सम्प्रदान कारक हैं । 

अतः , जिसके लिए क्रिया की जाय , उसे सम्प्रदान कारक कहते हैं ।

पहचान - क्रिया में ' किसके लिए लगाकर प्रश्न करने पर जो उत्तर मिले , वही सम्प्रदान है ।

टिप्पणी -

( १ ) कर्मकारक के ' को ' और सम्प्रदान कारक के ' को ' चिह्न में प्रमुख अन्तर यह है कि कर्मकारक के चिह्नवाले शब्द पर क्रिया का फल पड़ता है , परन्तु सम्प्रदान कारक के चिह्न वाले शब्द के लिए ही क्रिया होती है ।

 
( २ ) ' को ' के स्थान पर ' के लिए ' रखने पर भी अर्थ स्पष्ट हो , तो उसे सम्प्रदान कारक का चिह्न समझना चाहिए। 

जैसे-

-विद्यालय को भवन चाहिए । 

-विद्यालय के लिए भवन चाहिए |


5. अपादान कारक (विभक्ति - से)

पेड़ से पत्ता गिरा ।
आकाश से पानी बरसा ।
शिक्षक से गणित पढ़ो ।
भूत से न डरो ।
शत्रुओं से बचो ।
जेबकतरों से होशियार ।

उपर्युक्त सभी वाक्यों में संज्ञा के बाद ' से ' विभक्ति आयी है और इनमें एक वस्तु से दूसरी वस्तु के दूर होने का बोध होता है । 

अतः संज्ञा के जिस रूप से किसी दूसरी संज्ञा के दूर होने , अलग होने , डरने आदि का भाव प्रकट हो , उसे ' अपादान ' कारक कहते हैं । 

अपादान = हटाना , दूर करना , बिलगाव ।

टिप्पणी-

( क ) करण कारक और अपादान कारक में अन्तर साधन और श्रोत का

संज्ञा करण कारक के रूप में क्रिया का कारण ( साधन ) बन जाती है , पर अपादान कारक के रूप में वह एक प्रकार का स्रोत है । 

' वह कलम से अक्षर लिखता है ' में कलम से अक्षर खुद नहीं निकल पड़ते । 

लिखनेवाला कलम से देवनागरी के अक्षर लिखे या फारसी के । लिखता कोई और है , 

कलम लिखने का साधन है , लेखन का स्रोत नहीं । ' कलम ' करण कारक हुआ । 

पर , ' कवि के हृदय से कविता फूटती है ' में हृदय कविता का स्रोत है , साधन नहीं ।यहाँ ' हृदय ' अपादान कारक है । 

' से ' की स्थिति देखकर करण कारक और अपादान कारक का निर्णय हो सकता है -

करण कारक अपादान कारक
बाल्टी से पानी लाओ कुँए से पानी लाओ
वह कलम से चित्र बनाता है कलम से स्याही गिरती है

(२) ' से ' का प्रयोग दूर होने , अलग होने आदि के अतिरिक्त अन्य स्थितियों ( साथ , तुतना , दूरी , समय आदि ) का बोध कराने में भी होता है-
प्रेम से बोलो । रमेश भाई से ज्यादा तेज है । मोकामा से बरौनी कितनी दूर है ? माधव कल से बीमार है ।

( ३ ) ' से ' का प्रयोग कर्मकारक में - उसने राम से सब बयान कहा । ' कहना ' द्विकर्मक क्रिया है । ' राम ' गौण कर्म में ' से ' विभक्ति लगी है

6. सम्बन्ध कारक (विभक्ति का , के , की)

यह गाय का दूध है ।
इस स्कूल के लड़के बड़े तेज हैं ।
सावित्री राम की बहिन है ।
बनारस की साड़ियाँ अच्छी होती हैं ।

उपर्युक्त वाक्यों में गाय और दूध में ' का ' , स्कूल और लड़के में ' के , राम और बहन में ' की ' तथा बनारस और साड़ियाँ में ' की ' के कारण सम्बन्ध स्थापित होता है । 

इन विभक्तियों के अभाव में इनका अर्थ स्पष्ट नहीं होगा | गाय , स्कूल , राम और बनारस सम्बन्ध कारक हैं । 

अतः , संज्ञा के जिस रूप से उसका सम्बन्ध ( लगाव , स्वत्व , अपनापन ) किसी और वस्तु से मालूम हो , उसे सम्बन्ध कारक कहते हैं ।

का , के , की का प्रयोग :

( १ )

( क ) ' का ' के बाद एकवचन और पुल्लिंग शब्द रहता है तथा उस शब्द के बाद कोई विभक्ति नहीं लगती है । जैसे , यह आम का फल है ।

( ख ) ' के ' के बाद एकवचन और पुल्लिंग शब्द रहने पर उस शब्द के बाद कोई - न - कोई विभक्ति अवश्य लगती है । जैसे , आम के फल की चटनी बनाओ ।

' के ' के बाद आदरसूचक एकवचन और पुल्लिंग शब्द रहने पर उसके बाद विभक्ति रहना अनिवार्य नहीं है । जैसे , बापू राष्ट्र के निर्माता थे ।

' के ' के बाद बहुवचन और पुल्लिंग शब्द रहने पर उस शब्द के बाद विभक्ति रह भी सकती है या नहीं भी । जैसे , ये आम के फल हैं | आम के फलों का अचार बनाओ ।

( ग ) ' की ' के बाद एकवचन या बहुवचन स्त्रीलिंग शब्द रहता है तथा उसके बाद कोई विभक्ति रह भी सकती है या नहीं भी ।
अर्थात् ' की ' के बाद केवल स्त्रीलिंग शब्द होना अनिवार्य है ।
जैसे , यह आम की पत्ती है । आम की पत्ती से जल लेकर छिड़को । ये आम की पत्तियाँ हैं । आम की सूखी पत्तियों से खाद बनाओ ।

( २ ) ' पास ' , ' बीच ' , ' पीछे - पीछे ' , ' ऊपर ' , ' नीचे ' आदि स्थानसूचक शब्दों के पहले सदा ' के , का ही प्रयोग होता है

● वह पेड़ के पास पहुँच गयी ।
● जहाज अभी समुद्र के बीच है ।
● सावित्री यमराज के पीछे - पीछे चलने लगी ।
● पहाड़ के ऊपर एक मन्दिर था ।
● पहाड़ के नीचे नदी बहती है ।

( ३ ) सादृश्य - बोध कराने के लिए --- सोने की धूप ( सोना जैसी धूप ) छायी है । इस बच्चे गाल मक्खन का ( मक्खन जैसा गाल ) है।

( ४ ) करण कारक की विभक्ति ' से ' के अर्थ में - डंडे की चोट कभी खायी है ? वह हाकिम की कलम का मारा हुआ है ।

( ५ ) अपादान कारक की विभक्ति ' से ' के अर्थ में रमेश स्कूल का भागा हुआ है । कलकत्ते का चला वह आज यहाँ पहुँचा ।

7. अधिकरण कारक (विभक्ति - में , पै , पर) 

राम घर में सो रहा है ।
कुत्ता सड़क पर घूम रहा है ।

उपर्युक्त वाक्यों में राम का आधार ' घर ' है और कुत्ते का आधार ' सड़क ' है | अतः , आधार को ' अधिकरण ' कारक कहते हैं ।

पहचान - क्रिया में ' कहाँ ' लगाकर प्रश्न करने पर जो उत्तर मिले , वही अधिकरण है ।

' में ' का प्रयोग :

( १ ) किसी स्थान के भीतरी भाग का बोध कराने के लिए- 

पुस्तक सन्दूक में है ।
स्कूल में बच्चे पढ़ते हैं ।

( २ ) तुलना के लिए -- वह मित्रों में सबसे तेज है ।

( ३ ) समय का बोध कराने के लिए
अभी नहीं , बाद में आना ।
प्रारम्भ में परिश्रम करो ।

( ४ ) ' बीच ' , ' वास्तव ' , ' सचमुच ' , ' ध्यान ' , ' समझ ' आदि के साथ प्राय : ‘ में आता है । जैसे ,

नदी के बीच में मत जाओ ।
लड़का वास्तव में होशियार है ।
सचमुच उसने बड़ी बहादुरी की ।
मेरे ध्यान में तुम्हारी बात रहेगी ।
मेरी समझ में कुछ नहीं आता ।

' पर ' का प्रयोग :

( १ ) किसी पदार्थ की ऊपरी सतह का बोध कराने के लिए -
छत पर कौआ है ।
कुर्सी पर बैठो ।

( २ ) निर्भरता का बोध कराने के लिए-
आपकी दया पर मेरा भविष्य है ।
तुम पर काम सौंपकर मैं निश्चिन्त हूँ ।

( ३ ) किसी कार्य के लक्ष्य , उद्देश्य या प्रेरणा का बोध कराने के लिए -
मैं देश पर मर मिटूंगा ।
मातृभूमि पर शीश चढ़ाने , जिरा पथ जावें वीर अनेक।

( ४ ) साधन का बोध कराने के लिए -
उन दिनों डाक भी घोड़ों पर ही पहुँचायी जाती थी ।

( ५ ) कुत्सित प्रयोजन या लाभ प्रकट करने के लिए-
उसने थोडे पैसों पर ईमान बेच दिया ।
उसने सड़ी - सी नौकरी पर इज्जत दे दी ।

8. सम्बोधन कारक (विभक्ति - हे , हो , अरे , रे , अरी , री)

हे राम ! मुझे सुबुद्धि हो ।
हे राम ! रक्षा करो ।
अरे भाई ! सुनना जरा ।
रे दुष्ट ! तू बचकर कहाँ जायेगा ?

किसी को बुलाने , पुकारने , चेतावनी देने आदि के लिए संज्ञा के जिस रूप का प्रयोग होता है , उसे ' सम्बोधन ' कारक कहते हैं ।

सम्बोधन कारक की विभक्ति ' शब्द ' के पहले आती है और शब्द के बाद विस्मयादिबोधक चिह्न ( ! ) या कॉमा ( , ) लगाया जाता है ।

( १ ) ' हे ' का प्रयोग - देवी - देवताओं के सम्बोधन के लिए होता है-
हे देवि ! आप मुझपर प्रसन्न हों ।
हे शंकर ! हे भोलेनाथ ! मुझपर दया करो ।

( २ ) ' ओ ' का प्रयोग – अपरिचित व्यक्ति से याचना के लिए -
ओ बाबू ! एक पैसा दे दो ।
ओ भैया ! अन्धे की सहायता करो ।

( ३ ) रे ' का प्रयोग - क्रोध में बदमाशों के लिए या प्यार से छोटों के लिए -
रे पापी ! तू नष्ट हो जायेगा ।
रे ! तेरी यह मजाल !
रे ! तू सोता ही रहेगा , उठेगा नहीं , कुछ खा - पी ले , देर हुई ।

( ४ ) ' अरे ' का प्रयोग- 

( क ) अपरिचित को बड़े कष्ट में - अरे भाई ! जरा मेरी लाठी देना , अब चला नहीं जाता। 

( ख ) परिचित व्यक्ति के लिए हलकी बातचीत में- अरे भाई वर्मा साहब , आप दिल्ली से मेरे लिए कलम लेते आइएगा । 

( ग ) आश्चर्य प्रकट करने के लिए - अरे , यह कैसे हो गया ? 

( घ ) स्त्रीलिंग ' अरी ' और ' री ' का प्रयोग उपेक्षा , अवहेलना , प्यार में होता है -

अरी लड़की ! मुझे तुझे कोई अक्ल नहीं , दाल में नमक डाला ही नहीं । 

री औरत | तू उन में बड़ी है , बुद्धि में बहुत छोटी । 

री , तू बावरी हो गयी , किसी का कहा नहीं मानती । 


कारकों के सम्बन्ध में यह ध्यान देने की बात है कि कर्ता के ' ने ' कारक चिह्न और सम्बोधन के ' हे ' , ' अरे ' , ' हो ' आदि के अतिरिक्त अन्य जितने कारक चिह्न हैं , उनके प्रयोग सुनिश्चित नहीं ।

वे एक से अधिक कारकों के लिए भी प्रयुक्त होते हैं ।

अतः , कारक - चिह्नों के प्रयोग में विशेष सावधानी बरतने की आवश्यकता है।

● पुल्लिंग से स्त्रिलिंग एवं स्त्रीलिंग से पुल्लिंग में बदलने का नियम

चलते-चलते :

प्रस्तुत पाठ में हमने कारक के बारे में हिंदी ( karak in hindi ) में जाना, इसके अलावा आपने कारक के भेद एवं परिभाषा को बेहतरीन उदाहरण के माध्यम से समझा।

निश्चित रूप से आपको यह पाठ पसंद आया होगा, यदि आपके मन में कारक से सम्बंधित कोई भी प्रश्न है तो निचे कमेंट बॉक्स में पूछ सकते है।

हमें आपकी जिज्ञासाओं को शांत कर के ख़ुशी होगी।

सम्पूर्ण व्याकरण : शब्द > संज्ञा > सर्वनाम > वचन > लिंग > कारक > विशेषण > क्रिया > काल

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