लिंग किसे कहते है एवं इसके कितने प्रकार है ?

लिंग व्याकरण में सर्वनाम का एक प्रमुख भाग है।  यहाँ तक की किसी भी वाक्य के उच्चारण हेतु लिंग निर्णय का ज्ञान होना अति आवश्यक है। प्रस्तुत लेख में हम जानेंगे लिंग किसे कहते है एवं लिंग के कितने प्रकार अथवा भाग होते है। 

लिंग किसे कहते है ?

प्रकृति ने जीवों को दो भागों में बाँटा है -- स्त्री और पुरुष , नर और मादा । हिन्दी व्याकरण में भी शब्दों को दो ही वर्गों में बाँटा गया है -- स्त्रीलिंग और पुल्लिंग । इनमें सजीव और निर्जीव सभी शामिल हैं। अर्थात : संज्ञा के जिस रूप से किसी सजीव अथवा निर्जीव के जाती का बोध होता हो उसे लिंग कहते है। 

ling kise kahte hai

प्राणिवाचक पदार्थों के लिंग - निर्णय में प्रकृति हमारी सहायता करती है , पर अप्राणिवाचक पदार्थों का लिंग - निर्णय भाषा - प्रयोग के आधार पर ही होता है।

  ● वचन किसे कहते है ?

' गाय ' और ' बैल ' या ' मोर ' और ' मोरनी ' के लिंग - निर्णय में विशेष कठिनाई नहीं है , परन्तु ' मकान ' , ' पुस्तक ' , पेंसिल , ' कागज ' और ' अखबार ' का लिंग - निर्णय कैसे करें ?


हिन्दी में न केवल संज्ञाएँ स्त्रीलिंग और पुल्लिंग होती हैं , बल्कि विशेषणों और क्रियाओं को भी पुल्लिंग और स्त्रीलिंग रूपों में लिखा जाता है ।


उदाहरणार्थ -- छोटा वालक खेल रहा है । छोटी बालिका खेल रही है । बालक के लिए ' छोय ' विशेषण प्रयुक्त होता है और बालिका के लिए 'छोटी'।


पुल्लिंग शब्द ' बालक ' के लिए पुल्लिंग विशेषण ' छोटा ' रहेगा , न कि ' छोटी ' । उसी तरह स्त्रीलिंग शब्द ' बालिका ' के लिए स्त्रीलिंग विशेषण ' छोटी ' रहेगा , न कि ' छोटा ' ।


क्रियाओं के रूपों में भी स्पष्ट अन्तर दिखायी पड़ रहा है । यदि ' बालक ' के बदले संज्ञा ' बालिका ' हो , तो क्रिया का रूप ' खेल रहा है ' के बदले ' खेल रही है ' हो जायगा ।


हिन्दी में शब्द - स्वरूप का विचार ही लिंग - निर्णय में सहायक है , शब्दार्थ नहीं ।


प्राकृतिक जगत् में किस वस्तु का सम्बन्ध स्त्री से है और किसका पुरुष से , यह व्याकरण की दृष्टि से महत्त्वपूर्ण नहीं ।


पुरुषत्व का चिह्न ' मूंछ ' स्त्रीलिंग है और औरतों का ' जूड़ा ' पुल्लिंग हैं , पुरुष की ' धोती ' स्त्रीलिंग है और स्त्रियों का ' घाँघरा ' पुल्लिंग !


अतः , हमें शब्द - स्वरूप पर ही ध्यान देना चाहिए । 


शब्द - स्वरूप पर हम दो दृष्टियों से विचार करते हैं --


( १ ) वचन की दृष्टि से

( २ ) मूल ( कुल ) की दृष्टि से


वचन की दृष्टि से लिंग - निर्णय


लड़का, घोड़ा, गीत और  केश  एकवचन हैं तथा लड़के, घोड़े, लड़कियाँ,  कविताएँ,  कुर्सियाँ,  रातें, बातें आदि बहुवचन हैं ।


जब हम एकवचन शब्दों के बहुवचन बनाते हैं , तो यह दिखायी पड़ता है कि कुछ शब्दों के बहुवचन रूप ज्यों के त्यों बने रहते हैं और कुछ शब्दों के बहुवचन रूपों में अनुस्वार या चन्द्रविन्दु लग जाता है ।


क्रमसः एकवचन एवं बहुवचन 

( एक ) लोटा  ( दो ) लोटे ( दो ) बैल ( एक ) नाटक ( पाँच ) नाटक ( तीन ) रानियाँ ( एक ) भुजा ( दो ) भुजाएँ ( दो ) आँखें ( एक ) बैल ( एक ) रानी ( एक ) आँख


जिन विभक्ति - रहित शब्दों के बहुवचन रूपों में अनुस्वार या चन्द्रविन्दु का प्रयोग हो , वे शब्द स्त्रीलिंग होते हैं ।


ऐसे विभक्ति - रहित शब्द जिनके बहुवचन रूपों में कोई परिवर्तन नहीं होता या अन्त का ' आ ' ' ए ' में बदल जाता है , वे शब्द पुल्लिंग होते हैं ।


अतः , लिंग - निर्णय का एक सरल सूत्र है कि जिस शब्द का लिंग - निर्णय करना हो , उसका विभक्तिरहित बहुवचन बनाइए और यदि बहुवचन रूप अविकृत रह जाय या इस प्रकार विकृत हो कि उसमें अनुस्वार या चन्द्रविन्दु का प्रयोग न हो , तब शब्द को पुल्लिंग समझिए।


यदि शब्द का बहुवचन रूप इस प्रकार परिवर्तित हो कि उसमें अनुस्वार या चन्द्रविन्दु लग जाय , तब शब्द को स्त्रीलिंग समझिए ।


इस सम्बन्ध में एक सावधानी बरतने की आवश्यकता है । लिंग - निर्णय की दृष्टि से जब किसी शब्द का बहुवचन बनाएँ तो उसमें ओं ( रों ) का प्रयोग कभी न करें !


'ओं' लगाकर पुल्लिंग शब्दों के भी बहुवचन रूप बनाते हैं और स्त्रीलिंग शब्दों के भी,


जैसे,  लड़कों, लड़कियों, कमीजों, कुर्ती, मकानों,  फुलवारियों आदि ।


कुल की दृष्टि से शब्द के लिंग - निर्णय 


कुल की दृष्टि से शब्दों के भेद हैं -- तत्सम , तद्भव , देशी एवं विदेशी। शब्द के कुल का पता लगने से उसके लिंग - निर्णय में सुविधा होती है।


● तत्सम शब्दों का लिंग - निर्णय


नियम 1:  संस्कृत के पुल्लिंग और नपुंसक लिंग के अकरान्त , इकरान्त , उकारान्त शब्द हिन्दी में पुल्लिंग होते हैं ।


● अकारान्त - वृक्ष , क्रोध , त्याग , दोष , मोह , चन्द्र , समुद्र । अपवाद - जय , पराजय , विजय और विनय स्त्रीलिंग हैं ।


इसी के अन्तर्गत जिसके अंत में  आर , आय , आस ; ख ; ण , न ; त ; त्य , त्व , व , र्य ( भाववाचक संज्ञा में ) हो , वह पुल्लिंग होता है।


( क ) विकार , विस्तार , उपकार , विद । अध्याय , उपाय , समुदाय । मास , आवास , प्रयास , विकास आदि । अपवाद - आय , सहाय।


( ख ) दुःख , नख , मुख , लेख , शंख , सुख आदि।


( ग ) पोषण , भरण , श्रवण , हरण | चयन , दमन , नयन , पालन , वचन , विसर्जन आदि । अपवाद - शरण ।


( घ ) गणित , गीत , चरित , मत , स्वागत ।


( च ) गात्र , गोत्र , चरित्र , वित्र , नेत्र , मित्र , पत्र , शस्त्र आदि ।


( छ ) कृत्य , नृत्य । तत्त्व , महत्त्व , सतीत्त्व , स्थायित्व। गौरव , लाघव । कार्य , धैर्य , माधुर्य , वीर्य , शौर्य , सौन्दर्य।


● इकारान्त - पाणि , वारि आदि ।


● उकारान्त -- चक्षु , जन्तु , मधु आदि । हिन्दी में स्त्रीलिंग होते हैं नियम २. संस्कृत के स्त्रीलिंग आकारान्त , इकारांत , ईकारान्त , उकारान्त , ऊकारान्त शब्द


( क ) आकारान्त - चिन्ता , दया , माया , कृपा , क्षमा ; घटना , प्रार्थना , प्रस्तावना , रचना , वन्दना , वेदना ; चंचलता , नम्रता , लघुता , सुन्दरता ; कालिमा , गरिमा , महिमा , लालिमा आदि । सिद्धि आदि ।


( ख ) इकारान्त - उन्नति , कांति , गति , छवि , रीति , रुचि , शक्ति , प्रसिद्धि , वृद्धि , समृद्धि ,


( ग ) ईकारान्त - धी , नदी , पृथ्वी , रजनी , लेखनी , वाणी , श्री आदि ।


( घ ) उकारान्त - आयु , मृत्यु , वायु , स्नायु : ऋतु , धातु , रज्जु , रेणु ।


( ङ ) ऊकारान्त -- चमू आदि । 


तद्भव शब्दों का लिंग - निर्णय 


किसी तद्भव शब्द के तत्सम ( मूल ) रूप जानने पर लिंग - निर्णय में बड़ी आसानी होती है ।,मूल शब्द का जो लिंग होगा , वही तद्भव शब्द का भी लिंग होगा ।


नियम 1: संस्कृत के पुल्लिंग और नपुंसक लिंग के शब्दों के तद्भव ( उनसे निकले ) शब्द पुल्लिंग होते हैं।


अचरज ( आश्चर्य ) , काठ ( काष्ठ ) , खेत ( क्षेत्र ) , गाँव ( ग्राम ) , घी ( घृत ) , चंवर ( चामर ) , जी ( जीव ) , तारा ( तारक ) , दही ( दधि ) , दाँत ( दंत ) , दूध ( टुग्ध ) , नाच ( नृत्य ) , पत्थर ( प्रस्तर ) , पाँव ( पाद ) , मुँह ( मुख ) , मोती ( मौक्तिक ) , लोहा ( लौह ) , सींग ( शृंग ) , सोना ( स्वण ) , हाथ ( हस्त ) आदि ।


नियम २. संस्कृत के स्त्रीलिंग शब्दों के तद्भव रूप स्त्रीलिंग होते हैं।


आस ( आशा ) , आँख ( अक्षि ) , जीभ ( जिह्वा ) , दाल ( दालि ) , दूब ( दुवा ) , नाक ( नासिका ) , नींद ( निद्रा ) , भीख ( भिक्षा ) , भूख ( बुभुक्षा ) , भौंह ( भ्रू ) , मिर्च ( मरीच ) , लाज ( लज्जा ) , साख ( शाखा ) , साल ( शाला ) , साँझ ( संध्या ) , सीख ( शिक्षा ) आदि । 

तकारांत तद्भव शब्द - गत ( गति ) , जात ( जाति ) , ताँत ( तंतु ) , पाँत ( पंक्ति ) , वात ( वाता ) , रात ( रात्रि ) ।


अन्य प्रकार के शब्दों का लिंग निर्णय 

१. अकारांत और आकारांत शब्द - बाल , कर्ज , फर्ज , मर्ज , सिन्दूर , दिल , कातिल , पूँजीवाद , समाजवाद । जाड़ा , झंडा , आटा , सन्नाटा , कारखाना , दवाखाना , किस्सा , गुस्सा , हिस्सा आदि।


२. जिस शब्द के अंत में ' आँ ' हो — कुआँ , धुआँ आदि ।


३. जिस शब्द के अन्त में ' आकू , ' आलू हो - चाकू , तंबाकू । आलू , बालू , रतालू आदि ।


४. आव , त्व , पन , पा , पना , आ , आया , आवा , औड़ा , ना प्रत्यय से बने शब्द - उतराव , चढ़ाव : पुरुषत्व , मनुष्यत्व ; बचपन , बड़प्पन , लड़कपन बुढ़ापा , मोटापा ; गुंडपना , छोटपना ; घेरा ; फर्राय , सन्नाटा ; चढ़ावा , पहनावा ; कनौड़ा , हथौड़ा ; खाना , लिखना आदि ।


५. पहाड़ों , ग्रहों , दिनों , महीनों , वृक्षों , नगों और घातुओं के नाम - हिमालय , मंगलवार , सोमवार , आश्विन , आम , नीलम , सोना आदि ।


अपवाद - ग्रहों में पृथ्वी ; धातु में चाँदी , पीतल ; वृक्षों में कचनार , नीम स्त्रीलिंग हैं ।


६. कुछ प्राणिवाचक तथा फलों और अनाजों के नाम प्राणिवाचक - चीलर , तीतर , नीलकंठ , बेंग , झींगुर , काग , भेड़िया , पंछी , पिल्लू आदि ।


अनाज और फल - उरद , गन्ना , गेहूँ , चना , जौ , तिल , धनिया , धान , बूट , मटर । अमरूद , आम , केला , खरबूजा , जामुन , नीबू आदि ।


७. अन्य भाषाओं के पुल्लिंग और नपुंसक लिंग शब्द


( क ) उर्दू - जिनके अंत में आब , ब या श हो - कबाब , खिजाब , जवाब , जुलाब , नसीब , मजहब , मतलब ; ऐश , जोश , ताश आदि ।


( ख ) फारसी - दाग , बाग , खून , निशान , सूद , गुलाव , रेशम , जोर , दरबार , होश आदि ।


( ग ) अरबी - अदब , इजलास , खयाल , फर्क , हक , हाल , हिसाब , हुक्म आदि ।


( घ ) अंगरेजी -- इंजन , कमीशन , टिन , बटन , सम्मन , कोट , नोट , फुट , कोच , फंड , स्कूल , प्रेस , गिलास , बक्स , डाक्टर , थियेटर , प्रॉक्टर , मास्टर , मीटर आदि । ये स्त्रीलिंग होते हैं


१. ईकारांत शब्द -- ककड़ी , लकड़ी , छुट्टी , मिट्टी , चिट्ठी , रोटी , गोली , टोपी , बोली , होली , चलती , बढ़ती आदि । अपवाद -- जी , दही , घी , पानी , मोती पुल्लिंग हैं ( देखें तद्भव शब्द ) ।


२. जिस शब्द के अंत में ' अक ' हो - चमक , दमक , रौनक , सबक आदि ।


३. जिस शब्द के अंत में ' आर ' , ' आल ' और ' आह ' हो – कटार , तलवार , मार , बार , हार ; कुदाल , चाल , दाल , नाल ( कमल आदि की इंडी ) , राल , शाल ; आह , कराह , चाह , राह आदि ।


४. आई , ता , वट , हट , आस , न आदि प्रत्यय से बने शब्द - चढ़ाई , पढ़ाई , लड़ाई ; कटुता , मित्रता , शत्रुता ; बनावट , मिलावट , लिखावट , सजावट ; घबड़ाहट , चिकनाहट , प्यास , मिठास ; कतरन आदि । अपवाद - निकास , विकास ।


५. ' इया ' प्रत्यय से बने ऊनवाचक शब्द - खटिया , मचिया , डिबिया , पुड़िया ।


६. कृदंत संज्ञाएँ जिनके अंत में ' अन ' या ' अ ' हो -- उलझन , जलन , रहन , सूजन ; दौड़ , मार , लूट आदि । अपवाद -- उतार , खेल , नाच , बिगाड़ , मेल आदि ।


७. अनुकरणवाचक शब्द -- बड़बड़ , बकझक , झंझट आदि ।


८. हिन्दी संज्ञाएँ जिनके अन्त में ' ख ' हो - ईख , काँख , कोख , चीख , देख - रेख , भूख , राख , लाख ( लाक्षा ) , साख आदि । अपवाद -- पाख , रुख ।


९ . नदियों , नक्षत्रों , तिथियों के नाम -- गंगा , यमुना , कोशी , गोदावरी ; अश्विनी , भरणी , कृत्तिका ; परिवा , दूज , तीज आदि । अपवाद -- नदियों में सोन , दामोदर , ब्रह्मपुत्र , सिंधु ; नक्षत्रों में पुष्य , पुनर्वसु , हस्त , मूल पुल्लिंग हैं ।


१०. किरानों के नाम -- इलायची , जावित्री , लौंग , सुपारी आदि । अपवाद - कपूर , तेजपात आदि पुल्लिंग हैं ।


११. भोजनों के नाम - कचौड़ी , खीर , दाल , तरकारी , पूरी , रोटी आदि । अपवाद - भात , मोहनभोग , रायता , हलुआ आदि पुल्लिंग हैं ।


१२.  उर्दू के आकारांत , ईकारांत , तकारांत , शकारांत शब्द - दवा , दुनिया , हवा ; अमीरी , गरीबी ; अदालत , आदत , कीमत , किस्मत , दौलत ; नालिश , लाश आदि ।


अपवाद- दगा , मजा ; खत , दस्तखत , तख्त , दरख्त , वक्त , तारा आदि । तमीज आदि । विदेशी शब्द जिनके अन्त में ' इश ' या ईज ' हो – कोशिश , परवरिश ; कमीज , चीज ,


टिप्पणी -- ( १ ) सामासिक शब्दों के लिंग प्रायः अन्तिम शब्द के लिंग के अनुसार होते हैं ।

जैसे- रसोई - घर , माँ - बाप पुल्लिंग और धर्मशाला , लोटा - डोरी स्त्रीलिंग हैं ।


पुल्लिंग से स्त्रिलिंग एवं स्त्रीलिंग से पुल्लिंग में बदलने का नियम

चलते-चलते :

प्रस्तुत लेख में हमने जाना की लिंग किसे कहते है एवं लिंग के कितने प्रकार होते है। इसके अलावा हमने लिंग निर्णय के बारे में भी जाना , ताकि किसी भी वाक्य के उच्चारण के वक्त स्त्रीलिंग एवं पुल्लिंग में गलतियो की सम्भावना न रहे।   

सम्पूर्ण व्याकरण : शब्द > संज्ञा > सर्वनाम > वचन > लिंग > कारक > विशेषण > क्रिया > काल

एक टिप्पणी भेजें

1 टिप्पणियाँ