राष्ट्रीय एकता पर निबंध | Essay On National Unity In Hindi

राष्ट्रीय एकता पर निबंध : राष्ट्रीय एकता सभी देशवासियों के लिए और भारत की गरिमा की रक्षा हेतु एक महत्वपूर्ण मुद्दा है।

ऐसे में भविष्य में हमारे समाज के कर्मधार बनने वाले बच्चों के लिए राष्ट्रीय एकता को समझना अति आवश्यक है।

राष्ट्रीय एकता पर निबंध लिखने से बच्चों के और वयस्कों के मानसिकता में भी परिवर्तन आने की संभावनाएँ रहती है।

राष्ट्रीय एकता को प्रदर्शित करने के लिए हमारे देश में 31 दिसम्बर को राष्ट्रीय एकता दिवस भी मनाया जाता है.

यह सरदार वल्लभ भाई पटेल के जन्मदिवस के उपलक्ष्य में मनाया जाता है और गुजरात में बनी statue of unity भारतीय राष्ट्रीय एकता का प्रतिक है.

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Rastriya ekata par nibandh, essay on national unity

राष्ट्रीय एकता पर निबंध | Rastriya ekata par nibandh

भूमिका : राष्ट्र के सब घटकों में भिन्न विचारों और भिन्न अवस्थाओं के होते हुए भी आपसी प्रेम , एकता और भाईचारे का बना रहना ही राष्ट्रीय एकता की आधारशिला होता है ।

अतः उपरोक्त सभी गुण राष्ट्रीय एकता की मुख्य धाराएँ हैं तथा इसे ( राष्ट्रीय एकता ) को सुगठित करते हैं।

देश में भिन्नताएँ हों , लेकिन सभी नागरिक राष्ट्र प्रेम की डोर में बँधे रहें । उनका हृदय राष्ट्रभक्ति की भावना से ओत - प्रोत हो।

भारत में विभिन्नता : राष्ट्रीय एकता का महत्व

भारत अनेकताओं का देश है । यहाँ अनेक धर्मों , जातियों , वाँ , सम्प्रदायों और भाषाओं का अपूर्व संगम है तथा सभी लोग मिलजुल कर रहते हैं ।

यहाँ के लोगों का रहन - सहन , खान - पान और पहनावा भी भिन्न है । भौगोलिक , सामाजिक , सांस्कृतिक और आर्थिक असमानताएँ भी कम नहीं हैं।

अनेकता में एकता :

भारत में उपरोक्त विभिन्नता होते हुए भी एकता तथा अविरोध विद्यमान है ।

यहाँ सभी जातियाँ घुल - मिलकर रहती आयी हैं । यहाँ प्राय : लोग एक - दूसरे के धर्म का आदर करते हैं। वे दूसरे के प्रति संवेदनशील हैं ।

राष्ट्रीय एकता के बाधक तत्त्व :

भारत की राष्ट्रीय एकता के लिए अनेक खतरे हैं । सबसे बड़ा खतरा है- " कुटिल राजनीति "।

यहाँ के राजनेता ' वोट बैंक ' बनाने के लिए कभी अल्पसंख्यकों में अलगाव के बीज बोते हैं , कभी आरक्षण के नाम पर पिछड़े वर्गों को देश की मुख्य धारा से अलग करते हैं ।

इस देश के हिन्दू , मुस्लिम , सिख , ईसाई आदि विभिन्न अस्थाओं के लोग परस्पर प्रेम से रहना चाहते हैं लेकिन यह तथाकथित धर्मनिरपेक्ष भ्रष्ट नेता उन्हें बाँटकर रखना चाहते हैं ।

राष्ट्रीय एकता में अन्य बाधक तत्व हैं -

विभिन्न धार्मिक नेता , जातिगत असमानता , आर्थिक असमानता आदि ।

परस्पर संघर्ष के दुष्परिणाम :

जब देश में कोई भी दो राष्ट्रीय घटक संघर्ष करते हैं तो उसका दुष्परिणाम पूरे देश को भुगतना पड़ता है।

मामला आरक्षण का हो या राम - मन्दिर निर्माण का , उसकी गूंज पूरे देश के जनजीवन प्रभावित करती है।

अब हमारे देश के स्वतंत्रता संग्राम को ही ले लीजिये वह भी तो इतने सारे वीरों और नेताओं ने एकता के साथ संग्राम कर के हासिल किया था.

भारतीय स्वतंत्रता संग्राम राष्ट्रीय एकता का सबसे बेहतरीन उदाहरण 

दो सौ वर्षों से अधिक की गुलामी के पश्चात भारत 15 अगस्त 1947 ई . को स्वतंत्र हुआ । अंग्रेजों ने हमारे देश पर एक लंबे समय तक शासन किया । भारतीयों का अंग्रेजों ने अत्याचारी कार्यों द्वारा बेहद शोषण किया । वे भारतीयों को जानवर से भी बदतर समझते थे । विदेशी लोग भारत आय और भारतीयों को गुलाम बना लिया । 

वह स्थिति भारत के राष्ट्रभक्तों को असह्य थी । उन्होंने राष्ट्रीय एकता का परिचय देते हुए भारत को विदेशियों से स्वतंत्र कराने का विचार किया । हजारों व्यक्ति देश को स्वतंत्र कराने के लिए शहीद हो गये। 

लक्ष्मीबाई , वीर कुंअर सिंह , मंगल पांडे , भगत सिंह चन्द्रशेखर आजाद , सुभाष चन्द्र बोस शहीदों में से जाने माने नाम हैं। इनके अतिरिक्त हजारों और भी नाम हैं जो इतिहास के गर्भ में दबकर रह गए। 

अन्ततः इतने लोगो के राष्ट्रीय एकता से भरे प्रयास और आन्दोलन के द्वारा हम अपने देश को आजादी दिलाने में सफल हुए। 14 अगस्त की आधी रात को भारत स्वतंत्र घोषित हुआ। स्वतंत्र भारत के गणतंत्र के प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू हुए । 

देश को गणतंत्रात्मक प्रजातंत्र घोषित किया गया । तब से हम हर 15 अगस्त को स्वतंत्रता दिवस मनाते हैं । सभी विद्यालय , महाविद्यालय , कार्यालयों में हमारा राष्ट्रीय झंडा फहराया जाता है । प्रधानमंत्री पार्लियामेन्ट में झंडा फहराते हैं और राष्ट्र को संबोधित करते राज्यों में वहाँ के मुख्यमंत्री झंडोत्तोलन करते हैं । 

राष्ट्र के निवासी दूरदर्शन पर लाल किले में मनाये जानेवाले स्वतंत्रता दिवस समारोह को देखते हैं । वे वहाँ से दिये जाने वाले प्रधानमंत्री के भाषण को सुनने की प्रतीक्षा करते हैं । बिहार में मुख्यमंत्री राज्य को संबोधित करते हैं । 

हमारे विद्यालय में हमारे प्राचार्य ने इस वर्ष झंडोत्तोलन किया। झंडा लहराते ही छात्रों का समूह राष्ट्र गान शुरू हुआ। हमारे प्राचार्य ने छात्रों को तथा शिक्षकों को संबोधित किया। उन्होंने शहीदों की कुर्बानी की याद दिलायी। 

उन्होंने हमें चरित्रवान बनने को कहा ताकि हम देश के अच्छे और जिम्मेदार नागरिक बन सको हम देश के भावी नेता हैं। हमें अपने देश को फिर से गुलाम होने से बचाना है। हमें अपने नेताओं के बलिदान को नहीं भूलना चाहिए। 

उनके भाषण के बाद मिठाइयाँ बाँटी गयी और सांस्कृतिक कार्यक्रम संपन्न हुआ । इस दिन का हमारे देश में काफी महत्व है । स्वतंत्रता संग्राम और ब्रिटिश अत्याचार के हमारी आँखों के सामने प्रत्यक्ष हो उठता है। 

हम उन शहीदों को स्मरण करते हैं जिन्होंने देश के लिए और राष्ट्रीय एकता के लिए अपना सब कुछ यहाँ तक कि जीवन भी बलिदान कर दिया। 

हम अपने आपसे यह वादा करते हैं कि उनके बलिदान को व्यर्थ न जाने देंगे। 

इस तरह हम अपना स्वतंत्रता दिवस मनाते हैं। सभी कार्यालयों में कार्यालय के प्रमुख झंडोत्तोलन करते हैं। यह दिन सभी भारतीयों के लिए सर्वाधिक महत्वपूर्ण है। 

समाधान :

प्रश्न यह है कि राष्ट्रीय एकता को बल कैसे मिले ? संघर्ष का शमन कैसे हो ?

उसका एकमात्र उत्तर यही है कि देश में सभी असमानता लाने वाले कानूनों को समाप्त किया जाए।

मुस्लिम पर्सनल लाँ , हिन्दू कानून आदि अलगाववादी कानूनों को तिलांजलि दी जाए । उसकी जगह एक राष्ट्रीय कानून लागू किया जाए।

सभी नागरिकों को एक समान अधिकार प्राप्त हो। किसी को किसी नाम पर विशेष सुविधा या विशेष दर्जा न दिया जाए । भारत में तुष्टीकरण की नीति बन्द हो।

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