होली पर निबंध | Essay on holi in hindi

 Essay on holi in hindi : नमस्कार दोस्तो हिंदी निबंध की इस श्रृंखला में आप होली पर निबंध लिखना सीखेंगे। 

दरसअल रंगों से सराबोर इस रंगीन उत्सव होली पर निबंध हिंदी में प्रयुक्त शब्दों को भी होली की रंगिनियत से वाकिफ कराना होगा। 

इसीलिए इस essay of holi in hindi में हमने होली के त्योहार को पूरा कवर करने का प्रयास किया है। 

ओ आइये बढ़ते है होली का निबंध की तरफ,

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Holi par nibandh, essay on holi in hindi
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 होली पर निबंध हिंदी में | hindi essay on holi - (800 words)

 भारत उत्सवों का देश है । होली सबसे अधिक रंगीन और मस्त उत्सव है । इस । दिन भारत का प्रत्येक हिन्द भस्मीभूत भोले भण्डारी का अवतार होता है । 

भारतवर्ष में उस दिन । सभी फक्कड़ता और मस्ती की भाँग में मस्त रहते हैं । होलीवाले दिन लोग छोटे - बड़े , ऊँच - नीच , गरीब - अमीर , ग्रामीण - शहरी का भेद भुलाकर एक दूसरे से गले मिलते हैं तथा परस्पर गुलाल मलते हैं । 

आप essay on holi in hindi पढ़ रहे हैं। इस दिन प्रत्येक हिन्दू गुलाल से पुता हुआ नजर आता है ।



होली का महत्त्व : होली पर निबंध

 होली के मूल में हिरण्यकश्यप के पुत्र प्रह्लाद और होलिका का प्रसंग आता है । हिरण्यकश्यप ने प्रह्लाद को मार डालने के लिए होलिका को नियुक्त किया था ।

 होलिका के पास एक ऐसी चादर थी , जिसे ओढ़ने पर व्यक्ति आग के प्रभाव से बच सकता था । होलिका ने उस चादर को ओढ़कर प्रह्लाद को गोद में ले लिया और अग्नि में कूद पड़ी । 

वहाँ दैवीय चमत्कार हआ । होलिका आग में जलकर भस्म हो गई , परन्तु रामभक्त प्रह्लाद का बाल भी बाँका न हुआ । 

भक्त की विजय हई , राक्षस की पराजय । उस दिन सत्य ने असत्य पर विजय घोषित कर दी । 

तब से लेकर आज तक होलिका - दहन की स्मृति में होली का मस्त पर्व मनाया जाता है ।

नोट : कृप्या जहाँ-जहाँ essay on holi in hindi या फिर कोई अन्य वाक्य का प्रयोग किया गाया है, जो निबंध में fit नही बैठता उसे ignore कर दें। क्योकि इनका इस्तेमाल seo को ध्यान में रखते हुए किया गया है।



मनाने की विधि : essay on holi in hindi

 होली का उत्सव दो प्रकार से मनाया जाता है । कुछ लोग रात्रि में । लकड़ियाँ , झाड़ - झंखाड़ एकत्र कर उसमें आग लगा देते हैं और समूह में इकट्ठे होकर गीत गाते हैं। 

आग जलाने की यह प्रथा होलिका - दहन की याद दिलाती है । ये लोग रात को आतिशवाजी आदि छोड़कर भी अपनी खुशी प्रकट करते हैं । 

होली मनाने की दुसरी प्रथा आज सारे समाज में प्रचलित है । होली वाले दिन लोग प्रात : काल । से दोपहर 12 बजे तक अपने हाथों में लाल , हरे , पीले रंगों का गुलाल लिए हुए परस्पर प्रेमभाव से गले मिलते हैं । 

इस दिन किसी प्रकार का भेदभाव नहीं रखा जाता । किसी अपरिचित का भी गुलाल मलकर अपने हृदय के नजदीक लाया जा सकता है ।


नृत्यभाव का वातावरण : holi par hindi nibandh

होली वाले दिन गली - मुहल्लों में ढोल - मजीरे बजते सुनाई देते हैं । इस दिन लोग समूह - मण्डलियों में मस्त होकर नाचते - गाते हैं । 

दोपहर तक सर्वत्र मस्ती छाई रहती है । कोई नीले - पीले वस्त्र लिए घूमता है , तो कोई जोकर की मुद्रा में मस्त है । 

बच्चे पानी के रंगों में एक - दूसरे को नहलाने का आनंद लेते हैं । गुब्बारों में रंगीन पानी भरकर लोगों पर गुब्बारे फेंकना भी बच्चों का प्रिय खेल होता जा रहा है । 

बच्चे पिचकारियों से भी रंग की वर्षा करते दिखाई देते हैं । परिवारों में इस दिन लड़के - लड़कियाँ , बच्चे - बूढ़े , तरुण - तरुणियाँ सभी मस्त होते हैं । 

प्रौढ़ महिलाओं की रंगबाजी बड़ी रोचक बन पड़ती है । यह सब वातावरण शहरी होली का है । गाँव में होली का रूप मर्दाना हो जाता है । 

होली आने से कई दिन पूर्व ही गाँव की महिलाएँ ऐंठनदार रस्सी से घर के पुरुषों की मरम्मत करती है । प्रायः भाभियाँ अपने देवरों को रस्से पर नचाती हैं ।

त्योहार से परे


शायद त्योहार के बारे में सबसे अच्छी बात यह है कि लोगों को जो स्वतंत्रता का अनुभव है। कुछ प्रथाएं जो भारत के सख्त सामाजिक मानदंडों के कारण अन्य संदर्भों में अकल्पनीय होंगी, होली के उत्सव के दौरान पूरी तरह से स्वीकार्य हैं: रंगीन पानी के जेट, मिट्टी के कुंडों में दोस्तों को डुबोना और सहयोगियों के साथ शर्म के बिना मज़े करना। महिलाएं, विशेष रूप से, वे हैं जो अधिक लचीले नियमों की स्वतंत्रता की उस भावना का आनंद लेते हैं। यह मौज मस्ती करने और प्रतिबंधों के बिना मजा करने का समय है। वास्तव में, रंगों के इस त्योहार पर लगभग कुछ भी स्वीकार किया जाता है: चिंता मत करो, यह होली है!  
 

समानता का त्योहार


कुछ दिनों के लिए, त्योहार अमीर और गरीब के बीच सामाजिक अंतर को बंद कर देते हैं, वे सभी समान हैं, बिना किसी मतभेद के, एक-दूसरे को गले लगाने और साल में कुछ घंटे एक-दूसरे को खुशहाल होली की शुभकामनाएं देते हैं।


दोष : Holi's evil

होली के दिन कई बार अनुचित छेड़छाड़ , मदिरापान , लड़कियों के साथ छेड़खानी करने के कारण झगड़े पैदा हो जाते हैं । 

इनके कारण रंग में भंग पड़ जाता है । यदि इन दोषों को रोक लिया जाए तो इससे मस्त उत्सव ढूँढ़ना कठिन है ।

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होली का पर्व ऋतुराज वसंत के आगमन पर फाल्गुन की पूर्णिमा को आनंद और उल्लास के साथ मनाया जाता है। इन दिनों रबी की फसल पकने की तैयारी में होती है। फाल्गुन पूर्णिमा के दिन लोग गाते-बजाते, हँसते हँसाते अपने खेतों पर जाते हैं। वहाँ से वे जौ की सुनहरी बालियाँ तोड़ लाते हैं। जब होली में आग लगती है तब उस अधपके अन्न को उसमें भूनकर एक-दूसरे को बाँटकर गले मिलते हैं।

होलिका दहन के संबंध में एक कहानी प्रसिद्ध है-हिरण्यकशिपु की बहन होलिका को वरदान प्राप्त था कि आग उसे जला नहीं सकती। हिरण्यकशिपु ईश्वर को नहीं मानता था। वह अपने को ही सबसे बड़ा मानता था। उसका पुत्र प्रह्लाद अपने पिता के विपरीत ईश्वर पर विश्वास करता था। पिता ने उसे ऐसा करने के लिए बार बार समझाया, किंतु प्रह्लाद पर कोई असर नहीं हुआ। इस पर हिरण्यकशिपु बहुत क्रुद्ध हुआ। उसने अपने पुत्र को तरह तरह से त्रास दिए, किंतु प्रह्लाद अपने निश्चय से डिगा नहीं।

अंत में हिरण्यकशिपु ने उसे अपनी बहन होलिका के सुपुर्द कर दिया। होलिका प्रह्लाद को गोद में लेकर आग में बैठ गई। होलिका तो जल गई, किंतु भक्त प्रह्लाद का कुछ भी नहीं बिगड़ा। इस प्रकार होलिका दहन 'बुराई के ऊपर अच्छाई' की विजय है। 

एक अन्य कथा के अनुसार भगवान् श्रीकृष्ण ने इस दिन गोपियों के साथ रासलीला की थी। इसी दिन नंदगाँव में सभी लोगों ने रंग और गुलाल के साथ खुशियाँ मनाई थीं। नंदगाँव और बरसाने की ब्रजभूमि पर इसी दिन बूढ़े और जवान, स्त्री और पुरुष सभी ने एक साथ मिलकर जो रास-रंग मचाया था, होली आज भी उसकी याद ताजा कर जाती है।

खुशियों का प्रतिक है होली | Holi Essay In Hindi


पहले प्रीतिभोज का आयोजन होता था, गीतों, फागों के उत्सव होते थे, मिठाइयाँ बाँटी जाती थीं। बीते वर्षों की कमियों पर विचार होता था। इसके बाद दूसरे दिन होली खेली जाती थी। छोटे-बड़े मिलकर होली खेलते थे। अतिथियों को मिठाइयाँ और तरह

ह के पकवान खिलाकर तथा गले मिलकर विदा किया जाता था। किंतु आज यह पर्व बहुत घिनौना रूप धारण कर चुका है। इसमें शराब और अन्य

नशीले पदार्थों का भरपूर सेवन होने लगा है। राह चलते लोगों पर कीचड़ उछाला जाता है। होली की जलती आग में घरों के किवाड़, चौकी, छप्पर आदि जलाकर राख कर दिए जाते हैं। खेत-खलिहानों के अनाज, मवेशियों का चारा तक स्वाहा कर देना अब साधारण सी बात हो गई है। रंग के बहाने दुश्मनी निकालना, शराब के नशे में मन की भड़ास निकालना आज होली में आम बात हो गई है।

यही कारण है कि आज समाज में आपसी प्रेम के बदले दुश्मनी पनप रही है। जोड़नेवाले त्योहार मनों को तोड़ने लगे हैं। होली की इन बुराइयों के कारण सभ्य और समझदार लोगों ने इससे किनारा कर लिया है। रंग और गुलाल से लोग भागने लगे हैं।

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Conclusion: होली पर निबंध 

होली पर निबंध हिंदी में  और होली का निबंध essay on holi in hindi, आपको कैसी लगी comment box में जरूर बताइये। आशा करता हु आपको ये पसंद आई होगी। 

इस होली का निबंध कही भी उपयोग कर के आप अच्छा प्रदर्शन कर सकते हैं। इसी तरह के और भी विषयों पर लिखे गए निबंध इस ब्लॉग पर आपको मिल जाएगी। 

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